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5 सबसे महान योद्धा या विश्व विजेता
संपूर्ण मानव इतिहास के

By Sunny


Greatest World Conquerors

मानव जाती का इतिहास, इतिहास में हुए भयंकर युद्धों के परिणामों की ही कृति है | आदि काल से ले कर वर्तमान समय तक विभिन्न सभ्यताओं के भाग्यों का फैसला शक्तिशाली योद्धाओं ने अपने आदेशों और अपने सैनिकों की तलवारों के माध्यम से ही किया है | इतिहास में विभिन्न सदियों में कई विजेता योद्धा आये हैं, उनको विजेता कहने के पीछे का अर्थ इस बात से है की वे अपने समय में अत्यधिक कुशल और शक्तिशाली थे एवं उन्होंने अपने जीवन काल में बहुत ही गहरा प्रभाव छोड़ा | ये सभी योद्धा रणनीति बनाने में बहुत ही चतुर और उत्कृष्ट थे | वैसे इन्हें हत्यारा और लुटेरा कहने में भी कोई दो राय नहीं है क्योंकि ये सभी के सभी लाखों लोगों की मौत के जिम्मेदार हैं | जैसे जैसे इनकी शक्ति बढ़ती चली गयी वैसे वैसे इनके द्वारा नियंत्रित भूमि की सीमाएं भी बढ़ती चली गयी | पेश हैं 5 सबसे बड़े योद्धा या विश्व विजेता संपूर्ण मानव इतिहास के




5. चक्रवर्ती सम्राट अशोक :- मौर्यन राजपरिवार में जन्मा अशोक बचपन से ही शिकार और युद्धकला का प्रेमी था | अलग अलग ग्रंथो में उसके भाइयों की अलग अलग संख्याओं जिक्र हैं परंतु सबसे अधिक प्रचलित कथा के अनुसार राजा बिंदुसार की 16 पटरानियां थी और उनसे उसे 101 पुत्र प्राप्त थे | अपने पिता बिंदुसार की मृत्यु के पश्चात अशोक का उत्तराधिकारी संघर्ष 4 वर्षो तक चला | 273 से 269 BC तक चले 4 वर्ष के इस संघर्ष में अशोक ने अपने 99 भाइयों को मौत के घाट उतार दिया और उसके पश्चात और अधिक खून का प्यास हो कर शक्ति और हिंसा आधारित सम्राज्यदवादी रणनीति अपना ली | सन 269-261 BC तक इन 8 वर्षो में ही उसने अपने राज्य का विस्तार पूर्व में असम से ले कर पश्चिम में ईरान तक और उत्तर में हिंदुकश पर्वत से ले कर दक्षिण में गोदावरी नदी के दक्षिण तक कर दिया था | इस हिंसात्मक और रक्त पिपासु आचरण के कारन वह चण्ड अशोक कहलाया | सन 261 BC में वर्तमान ओडिशा में स्तिथ कलिंग अभियान के दौरान हुए भीषण नरसंहार के पश्चात उसने बौद्ध धर्म ग्रहण कर लिया और सदा के लिए हिंसा से किनारा कर लिया | सन 261-232 BC तक उसने अपना सारा जीवन बौद्ध धर्म का प्रचार प्रसार करने और मानवतापूर्ण कल्याणकारी कार्यो को करने में व्यतीत किया| इस दौरान वह महामानव अशोक और देवानाम प्रिय अशोक के नाम से पुकारा गया | बौद्ध धर्म ग्रहण करने से पूर्वे ही वह अपने राज्य का विस्तार नेपाल, पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और समूचे भारत मे कर चूका था |


चक्रवर्ती सम्राट अशोक

चक्रवर्ती सम्राट अशोक (304 - 232 BC)




4. अटिला हुण :- शायद ही इतिहास में अटिला जितना कोई ख़ौफ़नाक नाम हो | खुदा के कहर के नाम से विख्यात अटिला संपूर्ण इतिहास मे सबसे खतरनाक बारबैरियन conqueror था | रोमन साम्राज्य पर इसके द्वारा बरसाई गयी तबाही के कारण ही इसे खुदा का कहर नाम प्राप्त हुआ | उसने पूर्वी यूरोप में बसी हुण नाम की बारबैरियन जाती का नेतृत्व किया और संपूर्ण पूर्वी और मध्य यूरोपीय भाग पर अधिकार जमा लिया | जर्मनी से लेकर caspian सागर तक उसने 20 वर्षो तक राज किया | अपने चाचा की मृत्यु के बाद अपने भाई की हत्या कर वह राजा बना था | पूर्वी और पश्चिमी रोमन साम्राज्य में उसके नाम की दहशत थी | वह अपने दुश्मनो पर की गयी क्रूरता और निर्दयता के लिए जाना जाता था | 453 AD में अपनी शादी की रात अत्यधिक दारु के सेवन से उसकी मौत हो गयी | अटिला ने अपने समय में संपूण यूरोप पर अपना दबदबा बना रखा था |


अटिला हुण

अटिला (406 - 453 AD)




3. तैमूर लंग :- तैमूर का जन्म काबुल से 400 मील उत्तर में वर्तमान उज्बेकिस्तान मे हुआ था | जन्म से ही पैर में आंशिक लकवा होने के कारण उसे तैमूर लंग या तैमूर लंगड़ा के नाम से जाना जाता था | इस्लामिक आस्था का प्रतीक तैमूर स्वयं को इस्लाम की तलवार कहता था | लकवाग्रस्त होने के कारण उसका शुरुआती जीवन राजनीती में बीता | अनपढ़ होने के बावजूद भी वो बहोत ही होशियार था | तीन तीन भाषाओं के ज्ञाता तैमूर ने शतरंज के एक नए संस्करण का अविष्कार किया था | वह जल्दी ही मंगोल खान के शाशन में वरिष्ठ मंत्री बन गया और इसके पश्चात ही उसने तख्तापलट कर स्वयं को सम्राट घोषित कर दिया और इसी के साथ कत्लेआम और युद्धों से भरे शाशन की स्थापना हुई | सन 1370-1405 के बीच उसके विशाल सैन्य अभियानों के दौरान 17 मिलियन लोगों की मौत हो गयी | यह उस समय की विश्व आबादी का 5% थी | उसने स्वयं को चंगेज खां का वंशज बताया उसकी इस्लामिक मान्यताओं का अनुसरण किया | एशिया महादीप में ईसाई धर्म का कम होना और इस्लामिक फोल्लोवेर्स के ज्यादा होने के पीछे का मूल कारण तैमूर का कट्टरपंथी होना था | तैमूर ने Persia, Armenia , Georgia और Russia के कुछ हिस्से पर अपना अधिकार जमा लिया था |


तैमूर लंग

तैमूर लंग (1336 - 1405 AD)




2. सिकंदर महान :- जब भी पश्चिमी इतिहास में सबसे बड़े conqueror या विजेता की बात आती है तो सबसे पहले सिकंदर महान का नाम आता है | अपने पिता फिलिप द्वितीय की हत्या के बाद उसने मेसेडोनिया का शाशन महज 20 साल की उम्र मे संभाल लिया था | उसे महान दार्शनिक अरस्तु ने शिक्षा प्रदान की थी | 22 की उम्र तक आते आते उसने समूचे ग्रीस पर कब्ज़ा कर लिया था और वह एशिया माइनर के लिए रवाना हो गया था | सीरिया में डॉरिस तृतीय की सेना को पराजित कर उसने संपूर्ण पूर्वी भूमध्य सागरीय तट पर अपना अधिकार कर लिया | मिस्र में से होते हुए वह लड़ता लड़ता भारत पहुँच गया| यहाँ पर उसने अपना अभियान अपने सैनिको कहने पर रोक दिया जो कई वर्षो से युद्ध कर कर के बुरी तरह थक चुके थे | वह बहुत ही क्रूर और होशियार सैन्य रणनीतिकार था इसी वजह से उसने अपने दम पर उस समय की ज्ञात दुनिया के बहुत बड़े बहु भाग पर अपना अधिकार जमा लिया था | कई बार तो उसने अपनी चालों से ही पुरे के पुरे देश को समर्पण करने पर मजबूर कर दिया बिना एक भी व्यक्ति मारे | कुल 30 वर्ष की उम्र तक ही उसने भूमध्य सागर से लेकर हिमालय तक के विशाल बहु भाग पर अपना कब्ज़ा जमा लिया था | सन 323 BC में सैन्य अभियान के दौरान मात्र 33 वर्ष की उम्र में बुखार के कारण वह मारा गया | उसकी मृत्यु के साथ ही उसका साम्राज्य बहोत हिस्सो मे बट गया | उसके द्वारा बनायीं गयी battle tactics आज भी कई ख्यात मिलिट्री academies में सिखाई जाती है |


सिकंदर महान

सिकंदर महान (356 - 323 BC)




1. चंगेज खां :- बिना किसी डाउट के चंगेज खां को विश्व विजेता बोलने में कोई दो राय नहीं है | उसने सिकंदर के द्वारा जीते हुए हिस्से के भी डबल से भी ज्यादा हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया था | चंगेज खां के बचपन का नाम तेमुजिन था एवं इसका पिता एक छोटे से कबीले का सरदार था | पिता की मृत्यु के बाद नए सरदार ने चंगेज और उसके परिवार को निकल दिया और मरने के लिए छोड़ दिया | इन सभी विश्व विजेताओ की लिस्ट में सिर्फ चाजें खां ही ऐसा हे जिसने बिलकुल जीरो से अपनी शुरआत की | इतनी क्रूर शुरुआत के बाद भी उसने खानाबदोश जातियो को एक जुट कर के उन्हें सैन्य रूप से प्रशिक्षित किया और फिर अपने मंगोल आक्रमणों की शुरुआत की | उसने यूरोप और एशिया पर अभूतपूर्व गति और दक्षता के साथ अधिकार कर लिया | उसने भारत को छोड़ समूचे चीन, रूस के कुछ हिस्से, समूर्ण पर्शिया और मध्य पूर्व पर अपना कब्ज़ा जमा लिया | सिर्फ घोड़े पर बैठ कर इतने बड़े भू भाग पर कब्ज़ा करना उस वक़्त किसी के लिए भी असंभव से बात थी | एशिया से यूरोप तक जाने वाले सिल्क रोड के निर्माण कर श्रय उसे जाता है, बस एक ये ही बात उसके बारे मे अच्छी कही जा सकती है क्योंकि वह अनगिनत लोगों की हत्याओ का दोषी है | अत्तिला की तरह उसे भी खुदा का कहर माना जाता था | उसके रास्ते में जो गाँव या क़स्बा पड़ता वो उसको जला देता | वह अत्यंत ही निर्दयी एवं शक्ति और साम्राज्य का बहोत ही भूका था | इन सभी के बावजूद निश्चित रूप से वह बहोत ही बड़े मार्जिन के साथ मानव इतिहास का सबसे बड़ा विश्व विजेता है |


 चंगेज खां

चंगेज खां (1162 - 1227 AD)

















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